Apne aas paas maahaul ko dekh kar jo dil mehsuus karta hai, jo ehsaas dil ko hota hai, bas wahi shayari ke zariye likhne ki koshish ke tahat kuchh tarahi ghazals aur kuchh gair tarahi .... blog par aayen to zaruur islaah kijiyega .... dil se shukriry. - ishhak 'ashhar'
बुधवार, 27 फ़रवरी 2013
mere ehsasaat: GHAR SE DOOR
mere ehsasaat: GHAR SE DOOR: घर से दूर घर से दूर निकलके देखो, कितने तमाशे चलके देखो। दर्पण झूठ नहीं बोलेगा, ख़ुद ही ख़ुदसे मिलके देखो। वक़्...
रविवार, 17 फ़रवरी 2013
अहसास
अहसास मर न जाए, तो इंसान के लिए,
काफी है, इक राह की ठोकर लगी हुई ।
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वक़्त के पास न आँखें हैं, न अहसास न दिल,
अपने चेहरे पे कोई दर्द न तहरीर करो।
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मेरे घर की मुफ़लिसी को देख कर,
बदनसीबी, सर पटकती रह गयी।
एक दिन की मुख़्तसर बारिश के बाद,
छत कई दिन तक टपकती रह गयी,
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हम उसकी शरारत से, परेशां तो बहुत हैं,
हँसते हुए बच्चे को रुला भी नहीं सकते।
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ग़म इसलिए भी ज़रूरी हैं ज़िन्दगी के लिए,
बग़ैर धूप के पौधा, हरा नहीं होता।
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गहराइयों में रूह की सूरज उगा कर देखो,
तिश्नालब को धूप में, पानी पिलाकर देखो।
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चेहरा खुली किताब है, उनबान कुछ भी दो,
जिस रुख़ से भी पढ़ोगे, मुझे जान जाओगे।
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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013
Badle kitne mausam dekho
बदले कितने मौसम
बदले कितने मौसम देखो, छत मेरी भीगी थी लेकिन,
बदले न लेकिन हम देखो। उनकी पलकें पुरनम देखो।
सुलझाते सुलझाते उलझीं, याद उन्हें मैं आया समझो,
उनकी जुल्फों के ख़म देखो। उनकी आँखें जब नम देखो।
बनते बनते बात न बिगड़े, डरो रक़ीबों से पर ख़तरा,
सोचो, पर बोलो कम देखो. नहीं अज़ीज़ों से कम देखो।
हमने तो इक बात कही थी, क्या होगा इस देश का यारों,
आप हुए क्यों बरहम देखो। शैताँ हुआ है आदम देखो।
दुःख के कांटे चुनलो 'अश्हर',
मुरझाने का डर कम, देखो।
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रविवार, 10 फ़रवरी 2013
KUCHH SHE'R
आंधियों के बीच जो जलता हुआ मिल जाएगा,
उस दिये से पूछना मेरा पता मिल जाएगा।
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जलाकर दीप द्वारे पे, कोई बैठा है जाना है,
मुझे मत रोकिये,मुझको मेरा वादा निभाना है।
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मिला दिया है पसीना भले ही मिटटी में,
हम अपनी आँख का ,पानी बचा के रखते हैं।
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कहीं ख़ुलूश, कहीं दोस्ती, कहीं पे वफ़ा,
बड़े करीने से, घर को सजा के रखते हैं।
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शनिवार, 9 फ़रवरी 2013
GHAR SE DOOR
घर से दूर
घर से दूर निकलके देखो,
कितने तमाशे चलके देखो।
दर्पण झूठ नहीं बोलेगा,
ख़ुद ही ख़ुदसे मिलके देखो।
वक़्त बदलने वालों पहले,
अपने आप बदलके देखो।
फतवे ज़ारी करने वालों,
तेज़ धार पर, चलके देखो।
कौन, किसे, कब रुस्बा करदे,
चलो, सियासत चलके देखो।
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QARIIB
क़ री ब
गुज़र सके न तेरे मेरे दरम्या हवा,
आ सके क़रीब तो इतने करीब आ,
न सोच दर्द है किसी के इश्क़ में बहुत,
सच ये भी है, इस दर्द की है दर्द ही दवा।
हमने ही अपनी सोच को तब्दील कर लिया,
ख़ुद ही बदलके देख लें वो यार तो रहा।
बरबादियाँ समेटके दामन में भरली सब,
अब तेरी बद्दुआ रही न तेरा डर रहा।
अब हाथ क्या उठाए और माँगे ख़ुदा से क्या,
'अशहर' ने जो भी चाहा वो तूने किया अता।
गुज़र सके न तेरे मेरे दरम्या हवा,
आ सके क़रीब तो इतने करीब आ,
न सोच दर्द है किसी के इश्क़ में बहुत,
सच ये भी है, इस दर्द की है दर्द ही दवा।
हमने ही अपनी सोच को तब्दील कर लिया,
ख़ुद ही बदलके देख लें वो यार तो रहा।
बरबादियाँ समेटके दामन में भरली सब,
अब तेरी बद्दुआ रही न तेरा डर रहा।
अब हाथ क्या उठाए और माँगे ख़ुदा से क्या,
'अशहर' ने जो भी चाहा वो तूने किया अता।
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