गुरुवार, 30 नवंबर 2023

साल-ए-नौ (नया साल)

हरगिज़ न कोई लम्हा ग़म का तेरे पास आए,
इस साल-ए-नौ का हर दिन पल-छिन तुझे रास आए।
- इश्हाक 'अश्हर'

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

APNI PASAND KE KUCHH SHE'R


माँझी तो हमें छोड़कर मझधार में गए,
साहिल  पे हमें लेकर  तूफ़ान आए  हैं.
-इश्हाक 'अश्हर'
----------
मौसम का ज़हर दाग़ बने क्यों लिबास  पर,
यह सोच कर न बैठ सका  सब्ज़  घास  पर.
- अज्ञात
-------------
आग लेकर हाथ में पगले जलाता है किसे,
जब न ये बस्ती रहेगी तू कहाँ रह जाएगा।
- अज्ञात
-------------
उसके करम की बात न पूछो, उसके करम का क्या कहना,
इक   दरवाजा   बंद    करे   है,   सौ    दरवाजे   खोले    है।
- अज्ञात
-------------
कहने वाले दो मिसरों में सारा किस्सा कहते हैं,
नाच नहीं आता जिनको, वो आँगन टेढ़ा कहते हैं।
- अज्ञात
-------------

रविवार, 19 नवंबर 2023

तरही ग़ज़ल - "किसी बेवफ़ा से मुहब्बत हुई है"

ढूँढिये

ढूँढिये गर तो क्या नहीं मिलता"
तुझसा, हाँ दूसरा नहीं मिलता।
हौसला भी बहुत ज़रूरी है,
पंखों से आसमाँ नहीं मिलता।
मौत आ जाए कब किसी लम्हा,
हादसों का पता नहीं मिलता।
वो ख़फ़ा है  अगर बहुत मुझसे,
क्यूँ वो आख़िर ख़फ़ा नहीं मिलता।
कब तलक ढूँढियेेेेगा आख़िर यहाँ,
आदमी बावफा नहीं मिलता।
अपनी कश्ती ख़ुदा हवाले अब,
न मिले नाख़ुदा नहीं मिलता।
है कोई बात आप में 'अश्हर'
कोई तुमसे ख़फ़ा नहीं मिलता।
2122 1212 22/112