आंधियों के बीच जो जलता हुआ मिल जाएगा,
उस दिये से पूछना मेरा पता मिल जाएगा।
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जलाकर दीप द्वारे पे, कोई बैठा है जाना है,
मुझे मत रोकिये,मुझको मेरा वादा निभाना है।
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मिला दिया है पसीना भले ही मिटटी में,
हम अपनी आँख का ,पानी बचा के रखते हैं।
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कहीं ख़ुलूश, कहीं दोस्ती, कहीं पे वफ़ा,
बड़े करीने से, घर को सजा के रखते हैं।
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