बदले कितने मौसम
बदले कितने मौसम देखो, छत मेरी भीगी थी लेकिन,
बदले न लेकिन हम देखो। उनकी पलकें पुरनम देखो।
सुलझाते सुलझाते उलझीं, याद उन्हें मैं आया समझो,
उनकी जुल्फों के ख़म देखो। उनकी आँखें जब नम देखो।
बनते बनते बात न बिगड़े, डरो रक़ीबों से पर ख़तरा,
सोचो, पर बोलो कम देखो. नहीं अज़ीज़ों से कम देखो।
हमने तो इक बात कही थी, क्या होगा इस देश का यारों,
आप हुए क्यों बरहम देखो। शैताँ हुआ है आदम देखो।
दुःख के कांटे चुनलो 'अश्हर',
मुरझाने का डर कम, देखो।
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