माँझी तो हमें छोड़कर मझधार में गए,
साहिल पे हमें लेकर तूफ़ान आए हैं.
-इश्हाक 'अश्हर'
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मौसम का ज़हर दाग़ बने क्यों लिबास पर,
यह सोच कर न बैठ सका सब्ज़ घास पर.
- अज्ञात
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आग लेकर हाथ में पगले जलाता है किसे,
जब न ये बस्ती रहेगी तू कहाँ रह जाएगा।
- अज्ञात
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उसके करम की बात न पूछो, उसके करम का क्या कहना,
इक दरवाजा बंद करे है, सौ दरवाजे खोले है।
- अज्ञात
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कहने वाले दो मिसरों में सारा किस्सा कहते हैं,
नाच नहीं आता जिनको, वो आँगन टेढ़ा कहते हैं।
- अज्ञात
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