रविवार, 19 नवंबर 2023

ढूँढिये

ढूँढिये गर तो क्या नहीं मिलता"
तुझसा, हाँ दूसरा नहीं मिलता।
हौसला भी बहुत ज़रूरी है,
पंखों से आसमाँ नहीं मिलता।
मौत आ जाए कब किसी लम्हा,
हादसों का पता नहीं मिलता।
वो ख़फ़ा है  अगर बहुत मुझसे,
क्यूँ वो आख़िर ख़फ़ा नहीं मिलता।
कब तलक ढूँढियेेेेगा आख़िर यहाँ,
आदमी बावफा नहीं मिलता।
अपनी कश्ती ख़ुदा हवाले अब,
न मिले नाख़ुदा नहीं मिलता।
है कोई बात आप में 'अश्हर'
कोई तुमसे ख़फ़ा नहीं मिलता।
2122 1212 22/112

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